अनमोल वचन

अनमोल वचन

श्री भगवत गीता के चतुर्थ अध्याय में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं 'जब-जब धर्म का हा्रस होगा, लोग अधर्म की ओर बढते हैं, धर्म की अवमानना होती है, तब-तब मैं पापियों का नाश करने और धर्म के उत्थान के लिये पुन: संसार में अवतार रूप में आता हूं। इस उद्घोषणा का स्मरण कर हम क्षण-क्षण आप के अवतार की बाट जोह रहे हैं, क्योंकि जब आपने यह उद्घोषणा की थी कि महाभारत का काल था, जो आज के सापेक्ष श्रेष्ठ था। महाभारत में तो एक द्रोपदी के चीरहरण का प्रयास हुआ था, किन्तु आज कलियुग में तो असंख्य द्रोपदियां खून के आंसू बहा रही हैं। बाप-बेटी, भाई-बहन के रिश्ते कलंकित हो रहे हैं। आपकी प्रिय गऊ माता का खुलेआम वध हो रहा है। आज तो महाभारत काल से हजारों गुणा अनाचार और पाप बढ रहा है। आपने तो अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना का उद्घोष किया था। उस घोषणा को पूरा करने का समय तो लम्बे समय से चल रहा है। अधर्मी निर्भीक है, जबकि अच्छे लोग जैसे-तैसे अपनी प्रतिष्ठा बचाने का प्रयास कर रहे हैं। अत्याचार को मिटाने, नीति न्याय की स्थापना का अपना वायदा पूरा करने हेतु हे कृष्ण शीघ्र आईये, पापियों का सर्वनाश कीजिए। आपकी प्रतीक्षा में आंखें पथरा गई हैं।

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