अनमोल वचन

अनमोल वचन

आदमी यदि इस सच्चाई को जान ले कि वह काल के बन्धन में है और परमात्मा की व्यवस्था में परिवर्तन उसकी सीमाओं से परे है, तो उसका भय समाप्त हो सकता है और स्वयं को परमात्मा से जोड सकता है। मनुष्य का जीवन दो पहियों पर चल रहा है। एक पहिया स्वार्थों को साथ लेकर चल रहा है, दूसरा परहित अर्थात परिवार और समाज के प्रति उसके दायित्वों का बोध करा रहा है, आत्मचिंतन को विवश कर रहा है। अनेक योनियों में भ्रमण करने के पश्चात उसे यह श्रेष्ठ मानव योनि प्राप्त हुई है। इसका उसे सदुपयोग करना है अथवा संसार के राग रंगों मेें व्यर्थ गंवा देना है, यह उसके विवेक पर निर्भर है। जब सद्विवेक जागृत हो तो सद्गुणों और सदाचरण का प्रकाश मन को स्वयं ही प्रकाशित करने लगता है। ऐसे में किसी विशेष ज्ञान और विद्वता की आवश्यकता नहीं रह जाती। जीवन का पल-पल आत्म संयम से व्यतीत करने की प्रबल प्रेरणा जन्म लेने लगती है। मनुष्य निर्विकार हो जाता है। ऐसे में वह प्रभु के प्यार और कृपा की पात्रता पा सकता है।

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