अनमोल वचन

अनमोल वचन

सारी सृष्टि कुछ नियमों से संचालित हो रही है। मनुष्य भी इसका अपवाद नहीं है। वह कितना भी शक्तिशाली और सामथ्र्यवान क्यों न हो जाये स्वछन्द नहीं हो सकता। इस पर सबसे बडा बंधन काल का है। जो संसार में आया है उसे अपने निश्चित समय पर जाना ही है। आज तक कोई भी मृत्यु को जीतकर अमर नहीं हो पाया। हमारे अवतार भी इसके अपवाद नहीं हैं विडम्बना यह है कि आदमी को सब कुछ याद रहता है। वर्तमान भी, भूतकाल भी और भविष्य भी, परन्तु सिर पर मंडराता हुआ काल याद नहीं रहता। काल कब और अपने पंजों में ले लेगा यह पता नहीं। इस सबसे निश्चित मनुष्य का व्यवहार ऐसा होता है मानो उसे सदा के लिए यही रहना है। उसने धन, सम्पत्ति, सांसारिक पदार्थ आदि के संग्रह करने की कोई सीमा रेखा निश्चित नहीं की। इन्हीं में वह दिन-रात उलझा हुआ है। किसी भी प्रकार के अनाचार से भी संकोच नहीं करता। इस कारण समाज में संकट व्याप्त रहते हैं, परेशानियां सभी की बढ़ती है। यदि वह स्वयं को काल का बंदी मान ले और परमात्मा को मुक्तिदाता तो उसमें सृजित भ्रम समाप्त हो जाये।

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