अनमोल वचन

अनमोल वचन

दूसरों का शोषण कर वैभव बढाना उस मृग तृष्णा की तरह है, जो देखने में सच मालूम पडते हुए भी मिथ्या होती है। भलाई और बुराई का ऐसा वर्गीकरण नहीं हो सकता, जो अपने लिये एक प्रकार और दूसरों के लिये दूसरे प्रकार का परिणाम दे। आग औरों के लिये गरम और आप के लिये ठंडी सिद्ध हो, ऐसा होना असम्भव है। दूसरों के लिये अनुपयोगी सिद्ध होने वाला व्यक्ति अपने लिये भी लाभप्रद नहीं होता। प्रतिभाशालियों की गणना में वें ही आते हैं, जिन्होंने देश, समाज के कल्याण में हाथ बटाया हो। औरों को सुखी बनाये बिना कोई सुखी नहीं हो सकता। पेड लगाने पर औरों की तरह अपने को भी उसकी छाया में बैठने का अवसर मिलता है और के लिये कुआं जलाशय बनाने वाले उससे अपनी भी प्यास बुझाते हैं, अपनी क्षमताओं को इस स्तर तक परिष्कृत कर लेना कि उससे स्वयं और दूसरे भी लाभान्वित हो सकें तो वह प्रतिभा है, उसका विकास ही समय की मांग है और जो अपने साथ समाज की प्रगति का भी ध्यान रखे, उसके हेतु कुछ करे, वही सच्चा इन्सान है।

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