अनमोल वचन

अनमोल वचन

व्यक्ति का व्यक्तित्व सामान्यतया उतना ही दिख पडता है, जितना कि खाने कमाने के काम आता है। यह उसका बहुत छोटा सा अंश है। इसकी क्षमता इतनी ही है कि उससे जीवन यात्रा की गाडी घिसटती चले। गेहूं की भांति उगने और कटने में ही जीवन समाप्त हो जाता है। जिस तिस प्रकार से जीवन गुजार लेना मानव जीवन का लक्ष्य नहीं हो सकता। इतना तो पशु-पक्षी, कृमि कीटक भी कुशलतापूर्वक कर लेते हैं। अन्तराल की गहराई में प्रवेश किया जाये, परिष्कृत दृष्टिकोण के बरमे से उसे खोदा जाये तो पता चलेगा कि इसी भूमि में वह सब कुछ विद्यमान है, जिसे जीवन सम्पदा का सार तत्व कहा जा सकता है। इस सार तत्व की प्राप्ति ही व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारकर उसे सभी के लिये उपयोगी बना देती है। श्रेयष्कर यही है कि हम अपनी प्रतिभा जगायें, उपयोगिता बढायें। अपने लिये उपयोगी बनें और परमात्मा की सृष्टि के लिये भी। हम अनुपयोगी किसी के लिये भी न रहें। जो अपने लिये उपयोगी होता है, वह दूसरों के लिये भी उपयोगी हो सकता है, दूसरों की सेवा सहायता कर सकता है।

Share it
Top