अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रतिभावान व्यक्ति वह है, जो स्वयं के साथ-साथ दूसरों के लिये अपनी उपयोगिता सिद्ध करता है। साथ ही अपनी उपयोगिता में निरन्तर वृद्धि भी करता है। जो महान है, वह छिपा रहता है, उसे प्रयत्नपूर्वक ढूंढना पडता है। धातु की खदानें ढंूढनी पडती हैं, फिर उपलब्ध पदार्थ का शोधन करना पडता है, तब उपयोगी वस्तु हाथ लगती है। ढूंढ-खोज न की जाये तो पैरों तले की जमीन में ही सोने की खदान का अस्तित्व रहने पर भी कुछ पता न चलेगा और उस भूमि पर रहने वाला व्यक्ति दरिद्र ही बना रहेगा। ढूंढने के बाद खुदाई के लिये गहरे उतरने, साधन जुटाने और कठोर श्रम करने की आवश्यकता होती है। परिशोधन करने के बाद शुद्ध उपयोगी धातु प्राप्त होती है। अपने व्यक्तित्व को उपयोगी बनाने के लिये लगभग इसी प्रकार के प्रयास करने पडते हैं। इसे ही प्रतिभा जागरण कहा जाता है। प्रतिभा जागरण के पश्चात ही व्यक्त स्वयं के लिये, समाज के लिये और देश के लिये अपनी उपयोगिता सिद्ध कर पाता है।

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