अनमोल वचन

अनमोल वचन

सामान्यतया हम लोगों की पहचान उनकी वेशभूषा, पहनावे के ढंग आदि से करते हैं। विशेष पहनावे वाले व्यक्ति को विशिष्ट मानते हैं और सामान्य ढंग से पहनावे वाले व्यक्ति को सामान्य व्यक्ति समझते हैं, परन्तु विशेष व्यक्ति वे होते हैं, जो पहनावे को महत्व न देकर कार्य को महत्व देते हैं। उनके सामने उनका कार्य उतना महत्वपूर्ण होता है कि पहनावा उनके लिये कोई महत्व नहीं रखता, वें सदा जीवन जीते हैं। इस प्रसंग में स्वामी विवेकानन्द के साथ घटित एक घटना प्रासांगिक होगी। उन दिनों स्वामी जी अमेरिका में थे। एक दिन वे पगडी बांधे, चादर डाले शिकागो की एक सडक पर घूम रहे थे। उनकी वेशभूषा देखकर महिला ने अपने पुरूष मित्र से कहा 'जरा इन महाश्य को देखो, कैसी अनोखी पोषाक है।' स्वामी जी ने हेय दृष्टि से देख रही उस महिला से कहा 'बहन मैं जिस देश से आया हूं, वहां वस्त्र नहीं, चरित्र सज्जनता की कसौटी माना जाता है।' आदमी का मूल्यांकन उसके वस्त्रों से नहीं, उसके चरित्र, आचरण और व्यवहार (कार्यों) से किया जाना चाहिए।

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