अनमोल वचन

अनमोल वचन

शिवरात्रि पर्व भगवान शिव को स्मरण करने का, उनके गुणों को धारण करने की प्रेरणा देता है। उनके अलंकारों में मस्तक पर सुशोभित चन्द्रमा से यही प्रेरणा मिलती है कि हम उनके समान सभी को सुख-शांति और शीतलता प्रदान करें। जटा में समाई गंगा जिस प्रकार बिना भेदभाव के अपना जल स्नेह भाव से सबको प्रदान करती है, उसी प्रकार आप भी उस गुण को अपने चिंतन चरित्र में प्रवाहित कर सके तो देवाधिदेव महादेव की पूजा सार्थक हो सकेगी। उनके अपने तीसरे नेत्र ने कामदेव को भस्म कर दिया था, हमें भी अनैतिकता, अश्लीलता और कामुकता को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जिस प्रकार से शिव परिवार में सर्प, बिच्छू, मयूर एवं चूहों जैसे विरोधी स्वाभाव के प्राणी भी प्रेमपूर्वक रहते हैं, उसी प्रकार हम भी ऊंच-नीच, जाति-पाति, वैर-भाव को भुलाकर सबको साथ लेकर चलें तो जीवन आनन्दमय हो जायेगा। मात्र उनके गुणों का बखान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक शिवभक्ति वह है कि साधक, भक्त उनके गुणों को धारण कर शिवत्व को प्राप्त करें।

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