अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य अनेक वस्तुओं की कामना करता है। अपने से बडे और सुखी सम्पन्न स्थिति के लोगों को देखकर यह इच्छा उत्पन्न होती है कि हमारे पास भी इतना ही वैभव और ऐश्वर्य हो। इस प्रकार की तृष्णा ही असन्तोष का कारण बनती है। हमें चाहिए कि अपने से नीचे की स्थिति वााले गरीबों और दुखी लोगों से अपनी तुलना करते हुए सन्तोष की सांस लें कि प्रभु ने हमें अनेकों से कमजोर हालत में भले ही बनाया हो, पर असंख्यों से ऊंचा भी तो रखा है। असन्तोष के यदि दस कारण जीवन में होते हैं तो सौ कारण सन्तोष करने के भी होते हैं। जो कुछ भी सन्तोष का कारण हमें प्राप्त है, उन पर विचार करें कि परमात्मा ने हमें कितना कुछ दिया है और उन्हीं के आधार पर अपने चित्त को प्रसन्न रखने का प्रयत्न करें।

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