अनमोल वचन

अनमोल वचन

जिस प्रकार से विभिन्न जीव-जन्तु अपने स्वाभाव और स्वरों को नहीं बदल सकते, उसी प्रकार मनुष्य भी अपनी वाणी और स्वाभाव को नहीं बदल पाते, जबकि मनुष्य का जीवन जीव-जन्तुओं के जीवन से बहुत अलग और उच्च स्तर का होता है, उसमें सोचने-समझने और विचारने की शक्ति है। इसीलिये जीवन में यदि कोई सीख मिलती है, प्रेरणा मिलती है, तो वह अपने स्वाभाव और वाणी को बदलने का प्रयास करता है, तो उसके बाद ही यह कहा जा सकता है कि यह अमुक व्यक्ति बदल गया है, अब वह पहले जैसा नहीं रहा। सामान्य जीवन में हम जो व्यवहार करते हैं, उसमें वाणी की भूमिका अहम् होती है। वाणी को सुनकर उसके भावों को समझकर यह जाना जा सकता है कि अमुक व्यक्ति का स्वाभाव कैसा है, उसका मानसिक स्तर क्या है? समाज में वह किस स्थान, किस सम्मान को पाने का अधिकारी है।

Share it
Top