अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य का व्यक्तित्व तथा प्रभाव झलकता है उसकी वाणी से। जिस प्रकार से संगीत के वाद्य यंत्र की पहचान उसके स्वर से होती है, उसी प्रकार व्यक्ति की पहचान उसकी वाणी से होती है। बोलने का अन्दाज वाणी में झलकता है। भाव सुनने वाले अन्य व्यक्तियों पर अपना प्रभाव डालता है। वाणी की इसी विशेष अभिव्यक्ति के कारण रंगमंच, नाट्य शालाएं बनी, फिल्म उद्योग बना, जहां पर लोग अभिनय के माध्यम से लोगों को प्रेरित और प्रभावित करते हैं। इन अभिनयों में वेशभूषा, भाव भंगीमा से बढकर महत्वपूर्ण वाणी होती है। वाणी के बिना अभिनय अधूरा है। हमारा जीवन भी एक रंगमंच की भांति है, जिसमें भगवान ने हमें एक प्रकार का अभिनय करने के लिये संसार में भेजा है। हमारे द्वारा संसर में किया गया अभिनय ही हमारे व्यक्तित्व की छाप बन जाता है, वही हमारी पहचान बन जाता है। हमारी वास्तविकता दर्शाता है, हमारा स्वाभाव बतलाता है। अब यह हमारे ऊपर निर्भर है कि हम उस अभिनय में खरे उतरते हैं या खोटे सिद्ध होते हैं।

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