अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्राय: देखा जाता है कि कुछ अभिभावक अपने बच्चों की दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं कि दूसरे के बच्चे उनके बच्चों से अधिक श्रेष्ठ हैं, कुशाग्र हैं, परन्तु अभिभावकों की यह प्रवृत्ति बच्चों के अन्दर ईष्र्या के भाव को जन्म दे देती है। इससे बच्चे का आत्म विश्वास डगमगाने लगता है और बच्चा या तो कुंठित होकर हीन भावना का शिकार हो जाता है अथवा चालाक तद्यथा तिकडमी। यद्यपि अभिभावक ऐसा नहीं चाहते कि उनका बच्चा बिगडे, चालाकी करे, चीटिंग करे, परन्तु बच्चे के भीतर ईष्र्या का बीज बोने का काम वही करते हैं, शुरूआत वही करते हैं। किसी दूसरे की सफलता से ईष्र्या करना अपने आपको संकुचित करके सोचना है, क्योंकि एक व्यक्ति कभी भी किसी दूसरे की सफलता पर डाका नहीं डाल सकता और न ही किसी अन्य तरीके से उसे छीन सकता है। सफलता यदि सच में प्राप्त करनी है तो उसके लिये 'ईर्ष्या की नहीं, बल्कि अथक प्रयासों की आवश्यकता है।

Share it
Top