अनमोल वचन

अनमोल वचन

वैसे तो संसार में अधिकांश लोग अपने जीवन से असन्तुष्ट पाये जाते हैं, परन्तु ईष्र्यालु व्यक्ति शत प्रतिशत असन्तुष्ट होते हैं, ईष्र्या से पीडित व्यक्ति को असन्तोष हर पल घेरे रहता है। हर पल दूसरों से आगे बढने की चाहत उसे चैन से बैठने नहीं देती, प्रतिस्पर्धा तो प्रगति के लिये अच्छी चीज है, परन्तु उसमें ईष्र्या का भाव विकृति पैदा कर देता है। एक सफलता मिलने के बाद उसे लगता है कि अगले प्रयास में वह पिछड न जाये। इस कारण दूसरे का आगे बढना उसे रास नहीं आता। अपने इस स्वाभाव के कारण वह अपना शत-प्रतिशत नहीं दे पाता। फल स्वरूप दूसरों से पिछडना उसकी नियति बन जाती है। इसलिए दूसरों से तुलना न करें कि कल मैंने जितना परिश्रम और प्रयास किया था, आज उससे बेहतर है या नहीं। यदि बेहतर नहीं है तो अतिरिक्त प्रयास किये जायें। ऐसा करके ही प्रगति के मार्ग का प्रशस्त होना सम्भव है।

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