अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य की अनेक दुर्बलताओं में से एक दुर्बलता यह है कि वह हर समय दूसरों से अपनी तुलना करता रहता है। इस कारण उसकी सोचने, समझने की कल्पना शक्ति कुन्द पड जाती है, जिससे तुलना हो रही है, यदि वह हर क्षेत्र में उससे आगे है, तो मन में उपजी ईर्ष्या के कारण उसका आत्मविश्वास लडखडा जाता है और फिर वह अपने जीवन से, अपने भाग्य से, भगवान से शिकायतें ही शिकायतें करता रहता है। ईर्ष्या से ग्रसित व्यक्ति को यह लगने लगता है कि उसके अलावा अन्य सभी उससे बेहतर हैं, उन्नत हैं, सन्तुष्ट हैं। जिस समय व्यक्ति इस प्रकार की सोच को जीवन का सत्य मान लेता है, तो वह उन्नति के बजाय अवनति के मार्ग पर बढ जाता है, क्योंकि उसकी ऊर्जा अपनी उन्नति के लिये किये जाने वाले कार्यों में न लगकर दूसरों से अपनी तुलना करने में, कुढने में, नकारात्मक चिंतन में और केवल अपनी कमियों को देखने में व्यय होती है। वह सोच ही नहीं पाता कि अपनी प्रगति के लिये, विकास के लिये क्या अच्छा किया जाना चाहिए।

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