अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमारे पास जो कुछ भी है और हमारे आसपास जो कुछ है, उसमें अन्तर है, समानता नहीं है। यद्यपि यह अन्तर स्वाभाविक है, परन्तु यह अन्तर ही आदमी को बेचैन करता है। सबसे पहले आदमी की कामना रहती है कि जो भी अच्छी चीज है, वह उसके पास हो, अन्य किसी के पास न हो और यदि वह अच्छी चीज दूसरों के पास मिल जाती है तो वह मन ही मन चिढने लगता है। उसके पास है, मेरे पास क्यों नहीं। यह विचार उसके दिलों दिमाग पर इस प्रकार छा जाता है कि उसके जीवन को ही तहस-नहस कर देता है। ऐसा व्यक्ति अपने विकास के बारे में एकाग्र चित्त नहीं हो पाता और न अपने इच्छित लक्ष्य तक पहुंच पाता है। ऐसा सब ईष्र्या के कारण होता है। ईष्र्या व्यक्ति के मन में पनपने वाला विचार या भाव मात्र नहीं होता, बल्कि यह उसके जीवन जीने की प्रक्रिया का अंग बन जाता है। यह एक प्रकार से मानवीय स्वाभाव की विकृति ही है कि व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की प्रगति, सम्पन्नता, प्रसिद्धि तथा सम्मान को सहन नहीं कर पाता।

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