अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार में यदि हमारा कोई प्रतिद्वंदी, हमउम्र, हमारा निकट का पडौसी, रिश्तेदार हमसे अधिक सफल, अधिक प्रतिभाशाली अथवा अधिक सम्मान का पात्र बनता है, तो मन में सहज ही यह भाव उपजता है कि यह सब मेरे साथ क्यों नहीं। ये खुशियां मेरी क्यों नहीं? हमारे पास क्या है, इसे देखने के बजाय दूसरों के पास क्या है, यह जानने के लिये व्यक्ति अधिक लालायित रहता है। दूसरों की सम्पत्ति, सफलता, प्रसिद्धि देख उसे भी यह लगता है कि यह सब उसके पास भी हो। चूंकि यह सब हासिल करना सरल नहीं होता और इसमें समय भी लगता है, इसलिए व्यक्ति के अन्दर ईष्र्या का बीज पनप जाता है। ईष्र्या का बीज हर पल पनपता है और व्यक्ति को हर क्षण यह याद दिलाता है कि वह दूसरों से कम है, दूसरे उससे अधिक। इस प्रकार वह अपनी तुलना दूसरों से करता रहता है। स्वयं को ऊंचे स्तर पर दिखकर खुश होता है और कम स्तर जानकर दुखी होता है। तुलना के मूल में ईष्र्या का बीज छुपा होता है, जो लगातार विकसित होता रहता है। ईष्र्या जितनी बढती है, व्यक्ति उतना ही अधिक दुखी होता है।

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