अनमोल वचन

अनमोल वचन

स्वार्थ और अहंकार से मुक्त होकर दूसरों के लिए जो कष्ट उठाया जाता है, वही सच्चा धर्म है। दूसरों के लिए, राष्ट्र के लिए, विश्व के लिए, स्वयं का उत्सर्ग ही धर्म है। परहित अर्थात दूसरों की भलाई के लिए, खुशी के लिए, दूसरों की पीडा मिटाने के लिए, स्वयं का उत्सर्ग कर देना ही धर्म है। यह प्रक्रिया कुछ कष्टदायी तो प्रतीत होगी, परन्तु इसी में सुख, शान्ति और संतोष की प्राप्ति होती है। ऐसा करते हुए स्वयं को कष्टों और संकटों से घिरा महसूस कर सकते हैं, परन्तु अंतत: विजय धर्म की ही होतीहै और धर्म पालन का परिणाम अत्यंत श्रेष्ठ एवं संतोषदायक होता है। औरों को कष्ट, पीडा देना अधर्म है, जबकि परहित हेतु कष्ट, पीडा सहना धर्म है। हमें यह सदैव याद रखना चाहिए कि कष्ट तो जीवन का पर्याय है। जब जीवन है तो कष्ट होना स्वाभाविक है। इस लिए कष्टों की परवाह न करते हुए धर्म मार्ग पर चलते रहे-चलते रहे।

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