अनमोल वचन

अनमोल वचन

आज का इन्सान दुनियादारी में इतना उलझ गया है कि उसके पास अपने लिये समय ही नहीं है। हम केवल एक अंतहीन अंधी दौड का हिस्सा बनकर रह गये हैं। ऐसी दौड जिसकी न कोई दिशा है, न ही कोई उद्देश्य। यह दौड है आधुनिकता की, इच्छाओं की, प्रलोभनों की, सबसे आगे बढने की, जबकि आज आवश्यकता है हमें इस दौड से बाहर निकलकर अपने व्यक्तित्व में झांकने की, आवश्यकता है अपने को जानने, समझने और बदलने की, आवश्यकता है दूसरों में दोष ढूंढने के बजाय अपने भीतर छिपे दोषों को देखने-परखने और उन्हें दूर करने की, आवश्यकता है जो गुण जो अच्छाई हममें हैं, उसे और विकसित करने की, आवश्यकता है अपने से ऊपर के स्तर के लोगों के सापेक्ष जो अपने से नीचे के स्तर का जीवन जी रहे हैं, उनके बारे में, उनकी तरक्की के बारे में कुछ करने की, ताकि वें भी आपके जीवन स्तर की बराबरी पर आ सकें। तभी हम जीवन को सरल, सुगम, खुशहाल और शान्तिमय बना सकते हैं।

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