अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार के सभी मनुष्यों की तीन माताएं जगत जननी अर्थात परमात्मा, जिसके उदर में यह सारी सृष्टि समाई हुई है, दूसरे धरती माता, जिससे भौतिक शरीर की रचना हुई, जिसमें पैदा हुए, अन्न-जल से शरीरों का पोषण होता है, तीसरे जननी अर्थात वह मां, जिसने नौ महीने अपने गर्भ में रखा तथा अपना दूध पिलाकर हमारा पोषण किया। हमें अपनी तीनों माताओं के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए अन्यथा हम नरक के भागी होंगे, दोजख में जायेंगे। हम ईश्वर को अलग-अलग नामों से पुकारने के कारण उन्हें भिन्न-भिन्न समझने की भूल कर रहे हैं। इसी कारण अपने को अलग-अलग समझने का पाप कर रहे हैं। मंदिर हो या मस्जिद, गिरजाघर हो या गुरूद्वारा हो, पूजा की इबादत की भाषा एक ही है, फिर विभेद क्यों? समझना होगा कि असल उत्पात का भेद मुल्ला पुजारी का है। शाश्वत सत्य भी यही है कि जो पाप करता है, चाहे वह हिन्दू हो या मुस्लिम, उनके लिये नरक या दोजख तैयार है, वरना तो हिन्दुओं के स्वर्ग में जन्नत कोई अलग स्थान नहीं है। केवल कहना नहीं वस्तुत: जो करके दिखाना है कि हम हिन्दू हो या मुस्लिम, सब भारतवासी मां भारती की सन्तान हैं और इस मातृभूमि का जो भी कर्ज है, उसे अदा करने के लिये प्राण भी देने पडें तो हम तैयार हैं।

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