अनमोल वचन

अनमोल वचन

परमपिता परमात्मा को ईश्वर कहें, अल्लाह कहें अथवा वाहे गुरू, बात एक ही है, क्योंकि ईश्वर एक है, उसे हम किस नाम से पुकारें, कोई अन्तर नहीं पडता। संसार के सारे धर्म लगभग एक ही उपदेश देते हैं कि सदा सच बोलें, सच का ही व्यवहार करें, चोरी न करें, किसी को सतायें नहीं, किसी के साथ विश्वासघात न करें। कोई धर्म यह नहीं कहेगा कि चोरी करना अच्छा है, झूठ बोलना धर्म है, किसी निर्दोष को सताने से पुण्य मिलेगा, किसी का हक मारोगे तो शबाब मिलेगा। चाहे वेद हो, पुराण हो, गीता हो या कुरान हो, सभी सच्चा इन्सान बनने की शिक्षा देते हैं। अन्तर केवल हमारे विचारों में है। सभी प्राणी उसी एक ईश्वर की सन्तान हैं। जो वेद कहते हैं, पुराण कहते हैं, गीता का जो उपदेश है, कुरान भी वही दोहराता है। अल्लाह कहो या ईश्वर कहो, सूरत सीरत दोनों की एक ही रहेगी। गंगा जल हो या आबे जमजम, जल तत्व तो एक ही है, फिर भेद कैसा। सबका लक्ष्य ईश्वर की प्राप्ति है, फिर झगडा किस बात का है?

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