अनमोल वचन

अनमोल वचन

योग का शाब्दिक अर्थ है जोडना। एक अलग ईकाई को सम्पूर्ण आत्मा के साथ जोडना। योग के आठ अंग हैं। इनमें पांच बाह्य यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार, तीन अन्तरीय धारणा, ध्यान, समाधि। इस प्रणाली में कोई आसन निर्धारित नहीं किया गया। केवल सुविधाजनक और स्थिर मुद्रा ही ध्यान के लिये बनाई जाती हैं। कोई प्राणायाम भी निर्धारित नहीं केवल सांस को स्थिर किया जाता है। यम नियम का भी समान उद्देश्य है, जिनसे जीवन सुव्यवस्थित करना है। यम स्व संयम के व्रत हैं, जिनमें हिंसा, झूठ, चोरी, असंयम और अधिग्रहण से हटना है। अहिंसा का अर्थ केवल जान लेने से बचना नहीं, बल्कि जानबूझकर किसी विचार, शब्द और कार्य द्वारा पीडा न पहुंचाई जाये। सत्य केवल झूठ बोलने से बचना नहीं, बल्कि अतिश्योक्ति, वाकछल, बहाना आदि से भी बचना होता है। अस्तेय अर्थात चोरी से बचना। ब्रह्मचर्य अर्थात इन्द्रियजनित सुखों की लालसा से मुक्त होना। अपरिग्रह में संग्रह करने और लालच की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना। इसके अभ्यास के लिये व्यक्ति सभी अनावश्यक वस्तुओं का त्याग करे और सरल जीवन व्यतीत करे। योग का उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। सम्पूर्ण योग प्रणाली पंथ निरपेक्ष है। इसका अभ्यास प्रत्येक पंथ के व्यक्तियों को करना चाहिए।

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