अनमोल वचन

अनमोल वचन

संत कबीर कहते हैं 'बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोई, जो दिल खोजा आपना मुझसा बुरा न कोय।' भाव यह है कि यदि बुराई की खोज की जाये तो सबसे पहले बुराई हमें स्वयं में ही बहुत मिल जायेगी। हम व्यर्थ ही दूसरों में दोष ढूंढने में लगे रहते हैं। सबसे पहले हमें अपने भीतर ही झांककर देखना चाहिए कि मुझमें ही तो कोई दोष नहीं छिपा है। हमारी सबसे बडी गलतफहमी यह होती है कि हम स्वयं को गलत नहीं ठहरा पाते। स्वयं को सदैव सही मानते हैं और यह सोचते हैं कि हमसे कोई भूल हो ही नहीं सकती। दरअसल यह हमारा वहम है, जो हमें ऐसा सोचने पर मजबूर करता है। वास्तव में हम अपने अंदर से दोषों के कारण ही दूसरों में दोष ढूंढते हैं, देखते हैं। आत्मा के आवरण में छाई हुई कालिख ही हमें बाहर नजर आती है। यदि यह कालिख साफ कर दी जाये तो बाहर भी साफ-साफ दीखने लगेगा।

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