अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमारे देखने के तरीके का निर्माण हमारे बचपन से ही होने लगता है। जिस प्रकार का वातावरण, परिवार के लोग हमें मिलते हैं। परिवार के लोगों की मान्यताएं जिस प्रकार की होगी, परिजन हमें जो सोचने, समझने तथा देखन का तरीका हमें समझाते हैं उसी प्रकार का हमारा नजरिया, हमारा दृष्टिकोण बनता चला जाता है और हम आजीवन उसी आधार पर, उसी दृष्टिकोण से जीवन को देखते, परखते और समझते हैं। बात केवल दृष्टिकोण की है, यदि दृष्टिकोण साफ-सुथरा हो, सकारात्मक हो तो जीवन की दिशा ही बदल जाती है, रंगत निखरती है। यदि दृष्टिकोण नकारात्मक है तो जीवन की दिशा उस गर्त में चली जाती है, जहां से उतरना, निकलना, आसान नहीं होता। यह निर्णय हमें लेना है कि हमें किस दृष्टिकोण को अपनाना है और अपने निर्मित हो चुके त्रुटिपूर्ण दृष्टिकोण को कैसे सुधारना है।

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