अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमारे जीवन में कौन सा कर्म कब फलीभूत होगा, यह व्यक्ति के संज्ञान में नहीं होता। कर्मों का परिपाक तो जन्म जन्मान्तरों का खेल है और इस क्रम में विधाता ने कहीं कोई त्रुटि नहीं की है। सभी व्यक्तियों को अपने किये हुए शुभ व अशुभ कर्मों का फल भुगतना ही पडता है। कोई भी इससे बच नहीं सकता, चाहे अवतार कहे जाने वाले महामानव ही क्यों न हों। मर्यादा पुरूषोत्तम राम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इस क्षेत्र में विधाता ने किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं किया है। हर जीव समयानुसार अपने शुभ-अशुभ कर्मों के फलों को भोगा करता है और यह प्रक्रिया तभी थमती है, जब व्यक्ति निष्काम भाव से प्रभु को समर्पित करते हुए निरंतर लम्बे समय तक कर्म करता है। ऐसे निष्काम कर्म से व्यक्ति के जन्म जन्मातरों के संस्कारों का नाश होता है और जीव को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

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