अनमोल वचन

अनमोल वचन

कहा जाता है कि इन्सान नियति के हाथ का खिलौना है, नियति जैसा चाहती है, इन्सान समय-समय पर वैसे ही कर्म करता रहता है, परन्तु यह आंशिक रूप से ही सही है, क्योंकि हमारा जीवन जिन शक्तियों के द्वारा संचालित है, उनका हम सदुपयोग भी कर सकते हैं और दुरूपयोग भी। कार्य करने के लिये हम स्वतंत्र हैं, परन्तु हमारी सीमाएं कर्म करने तक ही सीमित हैं। हमारी स्वतंत्रता तभी समाप्त हो जाती है, जब हम कर्म कर चुके होते हैं, क्योंकि उसका फल भोगने के लिये हम परतंत्र हैं। वहां से महाकाल की स्वतंत्रता आरम्भ हो जाती है। इसलिए इस तथ्य को भली प्रकार समझकर ही हमें कर्म करने चाहिए। जिस प्रकार के परिणाम की हम आशा करते हैं, कर्म भी उसी के अनुरूप करने चाहिए। स्मरणीय यह भी है कि सदैव वर्तमान कर्मों के आधार पर अपने भविष्य में मिलने वाले परिणामों का आंकलन उचित नहीं, क्योंकि मिलने वाले परिणाम हमारे कई जन्मों के शुभ-अशुभ कर्मों के फल हो सकते हैं।

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