अनमोल वचन

अनमोल वचन

सतोगुणी व्यक्ति को श्रेष्ठ और सम्माननीय माना जाता है। सत्व गुण निर्मल होने के कारण प्रकाश करने वाला और विकार रहित है। इससे ज्ञान उत्पन्न होता है। इसका फल सुख, ज्ञान और वैराग्य कहा गया है। सत्वगुण में व्यक्ति स्वर्गादि उच्च लोकों को प्राप्त करता है, परन्तु यह ज्ञान से सम्बन्धित होने के कारण अभिमान को उत्पन्न करता है। सतोगुण श्रेष्ठ होने से इसे अध्यात्म का प्रवेश द्वारा माना जाता है, परन्तु सत्वगुण से प्राप्त सुख एवं ज्ञान से जो अभिमान उठता है, वह भी अत्यंत हानिकारक होता है, परन्तु भक्ति और सेवा के द्वारा वह अभिमान गल भी जाता है। भक्ति की जल धारा में सत्वगुणी का अभिमान बह जाता है और बचती है केवल भक्ति, क्योंकि जहां सच्ची भक्ति होती है, वहां अभिमान टिक नहीं सकता।

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