अनमोल वचन

अनमोल वचन

सामान्यतया सम्द्धि को भौतिक समृद्धि ही माना जाता है, परन्तु सच यह है कि समृृद्धि भौतिक नहीं, आध्यात्मिक तत्व है, इसका स्रोत आपके बाहर नहीं, भीतर है। आप कौन हैं, यह इसका हिस्सा है। अच्छी बातों को स्वीकारना जो कि पहले से आपके जीवन में हैं, हर प्रकार की समृद्धि का आधार है। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि 'कोई चीज ऐसी नहीं, जो आपके भीतर स्वरूप में मौजूद न हो। यदि किसी चीज के बारे में ऐसा सोच रहे हैं कि दुनिया उसे आप तक आने में रोक रही है, तो यह भ्रम है। वास्तव में आप उन्हें दुनिया में रोक रहे हैं। आप रोक रहे हैं, क्योंकि आपके भीतर कहीं गहरे तक यह सोच बसी है कि आपके पास देने को कुछ नहीं है। आपको क्या चाहिए? सराहना, प्रशंसा, प्यार, सहायता। जैसे ही यह लोगों को आप देना शुरू कर देंगे, आप स्वयं भी पाने लगेंगे। वह आपको नहीं मिल पायेगा, जो आप नहीं देते। बाहर की ओर का बहाव ही अन्दर की ओर के बहाव को निर्धारित करता है। ईसामसीह ने कहा था 'जिनके पास है, उन्हें अधिक दिया जायेगा, जिनके पास देने को कुछ नहीं है, उनके पास जो जरा भी है, वह ले लिया जायेगा लेना चाहते हो तो देना सीखना पडेगा। यह प्रकृति का नियम है।

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