अनमोल वचन

अनमोल वचन

अस्त-व्यस्त और अनियमित जीवन जीने वाले अपनी असफलताओं का दोष दूसरों पर मढते हैं अथवा दुर्भाग्य का रोना रोते हैं। ऐसे लोग लम्बी योजना बनाकर उस पर निश्चयपूर्वक और नियमित रूप से चलते रहना तो दूर अपनी दिनचर्या बनाने तक की आवश्यकता नहीं समझते और जीवन के बहुमूल्य समय को व्यर्थ की गपशप में अथवा आलस्य प्रमाद से गंवाते रहते हैं। कहा जाता है कि लक्ष्य और क्रम बनाकर चलने वाली चींटी पर्वत शिखर पर जा पहुंचती है, जबकि प्रमादी गरूड ऐसे ही जहां-तहां पंख फडफडाता और बीट करता दिन गुजारता है। समय और कार्य की संगति बैठाकर योजनाबद्ध दिनचर्या बनाकर उस पर आरूढ रहने का नाम नियमितता है। उसके बन पडते ही चिंतन को एक सही दिशा मिलती है। व्यवस्थित कार्यक्रम बनाकर उस पर चलते रहने से नई प्रेरणाएं मिलती हैं। फलस्वरूप सूझबूझ के साथ निश्चित किया गया कार्यक्रम सरलता और सफलतापूर्वक सम्पन्न होता चला जाता है। जो उसका उत्साह बढाता जाता है। ऐसे पुरूषार्थी को ही शूरवीर कहा जाता है। सुधारने निखारने योग्य आदतें अनेकों हैं, परन्तु उनमें मुख्य है नियमितता अर्थात समय, श्रम और चिंतन को एक सुनिश्चित दिशा में गतिशील रखना।

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