अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमें जीवन में अनेक बार सत्संग में जाने का अवसर मिलता है। अधिकांशत: तो सत्संग में भक्ति भाव वाले ही जाते हैं, किन्तु कुछ औपचारिकता वश। कभी-कभी पहुंचे हुए संत द्वारा ऐसे शिक्षाप्रद वचन कह दिये जाते हैं, जो मन को छू जाते हैं। बुरी आदतों का अभ्यासी भी उन आदतों को छोडने का संकल्प कर लेता है। जिनकी इच्छा शक्ति प्रबल होती है, वे एक झटके में ही संकल्पपूर्वक बुरी आदत त्याग देते हैं और उस पर दृढ रहते हैं, पर ऐसा होता बहुत ही कम है। बाहरी अवांछनीयताओं से जूझने के तो अनेकों उपाय हैं, परन्तु आन्तरिक दुर्बलताओं से एक बारगी गुथ जाना और उन्हें पछाडकर पीछे हट जाना दृढ इच्छा शक्ति के लोगों के लिये ही सम्भव है। दुर्बल मन वाले तो छोडने-पकडने, आगे बढने, पीछे हटने के कुचक्र में ही फंसे रहते हैं। अभीष्ट परिवर्तन न हो पाने का दोष जिसतिस या परिस्थितियों पर मढते रहते हैं, किन्तु सच्चाई यही है कि आत्म परिष्कार के लिये, सत्प्रवृत्तियों का अभ्यासी बनने के लिये दृढ निश्चय और नियमितता के अतिरिक्त अन्य कोई उपाय है ही नहीं। जिन्हें प्रगतिशील जीवन अपनाने की दृढ इच्छा हो, उन्हें अपनी आदतों का विश्लेषण कर उनमें से अनुपयुक्त को छोडने-बदलने का निश्चय कर ही लेना चाहिए। श्रेष्ठ मनुष्य बनने का एक मात्र उपाय यही है।

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