अनमोल वचन

अनमोल वचन

जो ज्ञान मनुष्य के सुसंस्कारों को जागृत कर चरित्र के सर्वोत्तम तत्वों को विकसित करे, उसकी उत्तम वृत्तियों को उन्नत करे, उसी को विद्या माननी चाहिए। जो ज्ञान मनुष्य को स्वाधीन और साहसी बनाये, विद्या कहलाने का गौरव उसे ही मिलता है। जो ज्ञान मनुष्य को सही दिशा, उन्नति का सही मार्ग और जीवन का सच्ची प्रकाश दिखाता है, उसे आध्यात्म कहते हैं। इस आध्यात्म को जागृत करने का कार्य विद्यार्थी काल से आरम्भ किया जाये। विवेक जगाने की विद्या न रही तो समाज पतित हो जायेगा। मनुष्य के भीतर जो पशुत्व है, जो गंदगी है, उसे दूर करने का एकमात्र उपाय विद्या की प्रवीणता ही है। जब तक जीवन की दिशा सात्विक न हो तो गुण, कर्म, स्वाभाव में सततत्वों का समावेश नहीं होता। मनुष्य की पशुता तब तक दूर नहीं हो सकती। आप मनुष्य की सर्वोत्तम विभुति उस विद्या, उस विद्वता और सद्ज्ञान को प्राप्त कीजिए, जिस विद्वता से मनुष्य स्वयं ही अपना योग्य मित्र बनता है, जिससे वह आजीविका कमाता है, जीवन को सुखी और सम्पन्न बनाता है, उसके लिये सच्ची लगन और गम्भीर चिंतन अध्ययन की आवश्यकता है। विद्या आत्मा की प्यास है। जीवन लक्ष्य की पूर्ति के लिये विद्या जरूरी है। कठोर से कठोर परिश्रम करके भी ऐसी विद्या प्राप्त हो सके तो आप भाग्यशाली हैं।

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