अनमोल वचन

अनमोल वचन

धनवान वही है, जिसके पास विद्यारूपी धन है। विद्याहीन मनुष्य पशु के समान है। विद्या द्वारा ही मनुष्य जीवन सार्थक होता है, क्योंकि वही मनुष्य के आत्मविश्वास का साधन है। संसार में विद्या से बढकर कोई मित्र नहीं, अविद्या से बढकर कोई शत्रु नहीं। विद्या के कारण ही मनुष्य समाज, परिवार और जीवन के आनन्द, उल्लास, सम्मान आदि का सुख लूटता है, मोक्ष तक प्राप्त करता है। अविद्या या अज्ञान ही सब असफलताओं का कारण है। जन्म से सब मनुष्य थोडे-बहुत अन्तर के साथ बराबर से होते हैं, पर विशेष क्षेत्र का ज्ञान, शिक्षण और विशेष अध्ययन ही उन्हें दूसरों से आगे बढाता है। विद्या नवयुवक का सहारा, धनवान का यश और प्रौढ का सुख साधन होती है। विद्या मिलने से विचारशील, एकाग्रचित और परिश्रमी बनता है। विद्या हमारी समृद्धि में आभूषण, विपत्ति में शरण स्थली और समस्त कालों में सुखमय जीवन का आधार होती है। विद्या का अन्तिम ध्येय ईश्वर को जानना है, मनुष्य को परखने की कसौटी उनके पूर्वजों द्वारा कमाया गया धन, जमीन जायदाद, सम्पत्ति नहीं है और न रूप-सौंदर्य ही है, वरन विद्या बुद्धि, सद्ज्ञान और विवेक के मापदंड से ही मनुष्य के व्यक्तित्व और श्रेष्ठता की परख होती है। सच पूछा जाये तो आदमी की योग्यता, विद्वता और प्रतिभा ही उसके बडप्पन की कसौटी है।

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