अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि मनस्थिति ही परिस्थितियों की जन्मदात्री हैं। मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही करता है और वैसा ही बन जाता है। हमारे द्वारा किये गये शुभ, अशुभ कर्म ही दुर्भाग्य अथवा सौभाग्य बनकर सामने आते हैं। उसी के आधार पर रोने-हंसने का संयोग बनता है, इसलिए परिस्थितियों की अनुकूलता और दूसरों से सहायता प्राप्त करने की फिराक में भटकने की अपेक्षा यह हजार गुणा श्रेष्ठ है कि स्वयं की भावनाओं और कर्मों को परिष्कृत किया जाये। नया साहस जुटाकर, नया कार्यक्रम बनाकर प्रयासरत हुआ जाये और अपने बोये हुए को काटने के सुनिश्चित तथ्य पर विश्वास किया जाये। भटकाव न आ पाये, उसका यही एक सुनिश्चित मार्ग है। मानव जीवन का परम पुरूषार्थ एक ही है कि वह अपनी निकृष्ट मानसिकता से मुक्ति मिल पाये। भ्रष्ट चिंतन और दुष्ट आचरण वाले स्वाभाव, अभ्यास को और अधिक ग्रहण करते रहने से उलटे पैरों लौट पडने में भी कोई बुराई नहीं है। गिनती गिनना, भूल जाने पर दोबारा नये सिरे से गिनना आरम्भ करने में किसी भी समझदार को संकोच नहीं करना चाहिए। यदि वह स्वयं का कायाकल्प करने की सोच सके तो महामानव बनने में देर नहीं लगेगी। आखिर वह ऋषियों-तपस्वियों का वंशधर ही तो है।

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