अनमोल वचन

अनमोल वचन

आईये जरा समझदारी से काम लें और बुद्धिमानों की तरह सोचना आरम्भ करें। मनुष्य जीवन ईश्वर की बहूमूल्य धरोहर है, जो स्वयं का कल्याण करने और दूसरों के कल्याण में सहायक की भूमिका निभाने के लिये मिला है। इसके लिये अपनी योजना सभी को अलग बनानी पडती है। मकडी अपना जाल स्वयं बुनती है और जब उसमें उलझ जाती है तो रोती है, परन्तु जब समझदारी से काम लेती है तो उसे समेटकर गोली बनाकर निगल लेती है। वह अनुभव करती है कि बन्धन कट गये और व्यथा वेदनाएं जो सहनी पड रही थी, वह सर्वदा के लिये समाप्त हो गई। इसी प्रकार हर मनुष्य अपने लिये अपने स्तर की दुनिया अपने हाथों अपने आप रचना है। उसी घौसले में अपना जीवन बिताता है, किसी दूसरे का कोई हस्तक्षेप नहीं। संसार में बाधाएं और सुविधाएं तो धूप-छांव की तरह आती-जाती रहती हैं। उनसे बेपरवाह वह अपने अभीष्ट पथ पर निरन्तर चलता रहता है। किसी में इतना साहस नहीं जो संघर्ष करने वाले के पैरों में बेडी डाल सके। ऊंचे स्तर के आश्चर्यजनक काम कर गुजरने वालों में से प्रत्येक की कथा गाथा इसी प्रकार की है, जिसमें प्रतिकूल परिस्थितियों का झीना परदा उन्होंने हटाया और वही कर गुजरे जो उन्हें अभीष्ट था। आप में भी यदि इच्छा शक्ति हो तो आप भी ऐसा कुछ कर सकते हैं, जो दूसरों के लिये प्रेरणा का स्रोत बन जाये।

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