अनमोल वचन

अनमोल वचन

एक बडी प्रसिद्ध कहावत है 'जैसा खायें अन्न, वैसा ही हो जाये मन।' इसका अर्थ है कि हम भोजन जैसा करेंगे, हमारा मन भी वैसा ही जो जायेगा। जैसा मन होगा, उसी प्रकार के हमारे विचार होंगे, जैसे विचार होंगे, आचरण भी वैसा ही होगा, जैसा आचरण होगा, वैसा ही हमारा व्यक्तित्व होगा। हमारे व्यक्तित्व के अनुसार ही हमारे प्रति विचार और दृष्टिकोण होगा। भोजन के तीन प्रकार हैं सात्विक, राजसिक और तामसिक। सात्विक आहरी के विचार पवित्र होंगे, आत्मा शुद्ध होगी। राजसी भोजन करने वाला अहंकारी होगा। मानवीय गुणों का अभाव होगा, तामसिक भोजी की प्रवृत्ति राक्षसी, संवेदनहीन और दया से रहित होगा। दया ही धर्म का मूल है। जिसमें दया नहीं, यह धार्मिक हो ही नहीं सकता। तामसिक और सात्विक भोजन का हमारे और दूसरों पर क्या प्रभाव होता है, वह एक सच्चे दृष्टांत से समझा जा सकता है। संत राबिया जंगल में तप कर रही थी। पशु-पक्षी उसके ईर्द-गिर्द बैठे क्रीडाएं कर रहे थे। पहुंचे हुए माने जाने वाले संत हसन उधर से निकले। हसन जैसे ही राबिया के समीप पहुंचे, पशु-पक्षी उन्हें देखते ही भाग खडे हुए। उन्हें अचम्भा हुआ और राबिया ने पूछा 'जानवर परिन्दे तुमसे लिपटे रहते हैं और मुझे देखकर भागते हैं, इसकी वजह? राबिया ने पूछा 'आप खाते क्या हैं? हसन ने कहा 'आमतौर से गोश्त ही खाने को मिलता है।Ó राबिया हंस पडी और बोली 'लोग आपको जो भी समझें, उनकी मर्जी, पर आपका दिल कैसा है, उसे यह मासूम जानवर अच्छी तरह जानते हैं।

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