अनमोल वचन

अनमोल वचन

कर्म, ज्ञान, भक्ति तीनों की अजस्र धारा प्रवाहित करने वाले महान ग्रंथ 'गीता' के गात्रक भगवान श्रीकृष्ण जी का आज अवतरण दिवस है अर्थात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी है। अपनी उस गीता में आपने ही वचन दिया था कि जब-जब धर्म की हानि होगी, अधर्म का प्रसार होगा, तब-तब मैं पापियों का संहार करने, धार्मिक जनों की रक्षा करने और धर्म की पुर्नस्थापना के लिये संसार में अवतार रूप में आऊंगा। हे कृष्ण आज वह समय का गया है। चारों ओर अधर्मियों का बोलबाला है। अधर्मी, पापी निर्भीक और निडर होकर अबोध बच्चियों से बलात्कार कर रहे हैं। द्रोपदियों का चीर हरण हो रहा है, दिनदहाडे खुलेआम हत्याएं हो रही हैं, पापियों ने साधु वेश धारण कर लिया है, आपकी प्रिय गऊमाता का वध हो रहा है। आज तो महाभारत काल से हजारों गुणा अनाचार और पाप में वृद्धि हो रही है। असंख्या द्रोपदियां खून के आंसू बहा रही हैं, रिश्तों की मर्यादाएं समाप्त हो गई हैं। आपने ही तो ऐसे में पुन: पुन: आने का वायदा किया था, अधर्म के उन्मूलन और धर्म संस्थापन का उद्घोष किया था। अत्याचार को मिटाने तथा नीति न्याय की स्थापना का अपना वचन पूरा करने हेतु हे कृष्ण पुन: आईये। पीडितों को अत्याचारों से बचाकर पापियों का संहार कीजिए। आपके आने की प्रतीक्षा में हमारी आंखें पथरा गई हैं। अपना वचन पूरा करो हे कृष्ण।

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