अनमोल वचन

अनमोल वचन

किसी का बुरा न करना सभी के वश में है। किसी का बुरा होने पर मन में आने वाला प्रसन्नता अथवा दुख का भाव मनुष्यत्व की कसौटी है। किसी का बुरा न करना, बुरा न सोचना कर्मयोग की नींव है। बुराई छोडने से दो अवस्थाएं आती हैं, सबका भला ही करेंगे अथवा कुछ भी नहीं करेंगे। दूसरों का हित करने का अर्थ है ऋण चुकाना। ऋणी की मुक्ति उनके अधीन है, जिनका ऋण है। पशु-पक्षी मानव के लिये नहीं, बल्कि मानव उनके लिये हैं। दूसरों का हित कैसे किया जाये, यह मनुष्य पर निर्भर करता है। दानों में किसी को अच्छी शिक्षा का दान देकर सन्मार्ग पर लगाना सर्वश्रेष्ठ दान है। इससे स्वयं की सद्गति होने के साथ दान ग्रहण करने वाले की भी सद्गति हो जाती है। जो सच्चे मन से सच्ची भावना भगवत प्राप्ति का मार्ग बताते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे बडे दाता हैं। अपना जीवन केवल अपने लिये ही नहीं, दूसरों के हित के लिये भी जीना सीखें। परहित करना एक पवित्र कार्य है, कर्मयोगी की पहचान है। तुलसीदास कहते हैं 'परहित की भावना जिनके मन में होती है, उनके लिये संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं होता। प्रतिकूलताओं में भी उन्हें शिखरों की प्राप्ति होती है। उनके पुराने पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

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