अनमोल वचन

अनमोल वचन

आदमी अकेला ही संसार में आता है और अकेला संसार से जाता भी है। न कोई साथ आया है और न कोई साथ जाता है। सच यह भी है कि उसे अपनी जीवन यात्रा भी अकेले ही पूरी करनी पडती है। इसलिए जीवन यात्रा में अकेले चलने की क्षमता पैदा करें, क्योंकि सिवाय अन्तिम यात्रा के कोई भी आपको अपने कन्धों पर बिठाकर आपको मंजिल तक नहीं पहुंचा सकता। आप आफिस में काम करते हैं, अकेले ही अपने कार्य को सम्पन्न करना पडता है। दूसरों का सहारा तका तो समझो कुछ न कुछ त्रुटि ऐसी हो सकती है, जिसका दंड आपको भुगतना पडेगा। संसार में आकर रिश्ते-नाते, परिवार और समाज जहां आप रहते हैं, वे केवल आपके उत्तरदायित्वों और कत्र्तव्यों को पूरा करने के माध्यम और प्रेरणास्रोत हैं, ताकि आप भटकें नहीं। सन्तान का पालन पोषण अकेले करना होगा। उनके अन्य उत्तरदायित्वों को पूरा करने का कार्य भी आपका अकेले का ही है। दूसरों के सहारे गृहस्थी नहीं चलेगी। परावलम्बी, पराजित, पिछलग्गू का अपमानजनक जीवन भी कोई जीवन है। प्रकृति ने आपको स्वतंत्र बुद्धि दी है, स्वतंत्र शरीर दिया है, ऐसी शक्ति दी है, जो किसी दूसरे के सहारे काम नहीं करती। अपनी मौलिक शक्ति, क्षमता का सदुपयोग कीजिए। स्वतंत्र जीवन बिताईये। स्वावलम्बी बनिये। इसी में आपका गौरव है, आपका स्वाभिमान है।

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