अनमोल वचन

अनमोल वचन

जगत के कोलाहल के मध्य तथाकथित अपने कहने वालों के बीच, मित्रों, साथियों के बीच भी अपने अकेलेपन को न भूलिये। जगत के व्यवहार के मध्य भी अपने को अकेला समझने का अभ्यास अवश्य करते रहें। नियमित रूप से आप ऐसा समय निकाल सकते हैं, जब आप अपने अकेलेपन पर विचार कर सकें, अपनी अन्तज्र्योति के सानिध्य को प्राप्त कर सकें, उस पर विश्वास कर सकें। इससे आत्मशक्ति की वृद्धि का अनुभव आप अवश्य करेंगे। आपका आत्मबल बढे, उसके लिये सर्वप्रथम आप ऐसे कार्यों का चुनाव करें, जिन्हें आप अपने बलबूते पर पूरे कर सकें। दूसरों के भरोसे कल्पना के बडे-बडे महल न बनायें, बच्चों की तरह दूसरों के कन्धों पर चढकर चलने की वृत्ति का त्याग करें, दूसरों के बलबूते आपको स्वर्ग का भी राज्य, अपार धन सम्पत्तियों का अधिकार, उच्च पद प्रतिष्ठा भी मिले तो उसे ठुकरा दें। अपने आत्मसम्मान के लिये अन्तज्र्योति को प्रज्जवलित रखने के लिये और स्वावलम्बी बनने के लिये अपने स्वयं के प्रयत्नों से आप छोटी सी झोपडी में रहकर धरती पर विश्राम करके, मिट्टी खोदकर कडा जीवन भी बितायेंगे तो बहुत बडी सफलता होगी आपके अपने लिये। इससे आपके स्वत्व में वह शक्ति क्षमता पैदा होगी, जो किसी भी सम्पत्तियों के स्वामी को दुर्लभ नहीं होगी।

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