अनमोल वचन

अनमोल वचन

गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा 'उद्धरेदात्मनात्मनम्, नात्मान मम सादेयत्' अर्थात हम स्वयं ही अपना उद्धार कर सकते हैं, अन्य कोई नहीं। इस शिक्षा को पक्की तरह अंकित कर लें। अकेले ही आगे बढने के लिये, मार्ग पाने के लिये आपको अपनी आत्मा पर विश्वास करना होगा, उसे ही अपना सर्वस्व समझना होगा। आत्म स्वत्व को अपनी आत्म शक्ति को भुला देने वाला व्यक्ति अधिक दिन नहीं चल सकता। उसे तो संसार ही नष्ट कर डालता है। आत्मशक्ति को समझने, मानने और उसे बढाने के लिये उन सभी बुरे कर्मों से बचना होगा, जो हमारे अन्र्तबाह्य जीवन को कलुषित करते हैं। इसके लिये सबसे बडी आवश्यकता है संयम की, क्योंकि संयमी ही स्वावलम्बी हो सकता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में स्वावलम्बी बनने का प्रयत्न करें। कर्म क्षेत्र में, व्यवहारिक जीवन में आप जितना बोझ अपने ऊपर उठायेंगे, उतने ही आपके 'अकेले' की शक्ति बढती जायेगी, उतनी ही वृद्धि आपकी क्षमताओं में होगी। अपने प्रत्येक कार्य को स्वयं पूर्ण करें। किसी कार्य को दूसरे पर न छोडें। दूसरों के सहारे की आशा तनिक भी न रखें। आपमें दूसरों का सहारा लेने का भाव आया तो समझो आपने असफलता की ओर कदम बढा दिया। सफलता आपसे रूठ जायेगी।

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