अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार में शक्तिशाली वही है, जो आत्मनिर्भर है और कमजोर वह है, जो दूसरों का मुंह ताका करते हैं। दूसरों के ऊपर उम्मीदें लगाये बैठे रहते हैं। परावलम्बी को, दूसरों के सहारे चलने वाले लोगों को अपने जीवन का बहुत समय नष्ट करना पडता है। नेपोलियन के शब्दों में 'जो अकेले चलते हैं, वे तेजी से आगे बढते हैं। मनुष्य को दो प्रकार से शिक्षा मिलती है, एक दूसरे के कहने, सुनने अथवा पुस्तकें पढने पर और दूसरी शिक्षा मनुष्य स्वयं जीवन और जगत की खुली पुस्तक से, अपने अनुभवों से सीखता है, दूसरे प्रकार की शिक्षा ही स्थायी और ठोस होती है। पहले प्रकार की शिक्षा केवल मात्र ऊपरी सहायता करर पाती है। यही कारण है कि आजकल ऊंची से ऊंची बातें कही जाती हैं, पुस्तकों में पढाई जाती हैं, परन्तु लोगों का उससे कोई विशेष भला नहीं हो पाता। उन सबसे भी केवल वही व्यक्ति लाभ उठा पाता है, जो स्वयं निर्माण की बुद्धि का प्रयोग करता है। कई बार तो यह ऊपरी शिक्षा मनुष्य को भ्रम में डालने का कारण भी बन जाती है। चाहे व्यापार हो, शिक्षा, उद्योग, आविष्कार, उपार्जन के सभी क्षेत्रों में वही मनुष्य आगे बढ सकता है, जिसने अपने को अकेले समझ लिया, वही सफल होगा, वही आगे बढेगा।

Share it
Share it
Share it
Top