अनमोल वचन

अनमोल वचन

यह तथ्य सर्वविदित है कि परम पिता परमात्मा निराकार है, उसका कोई आकार नहीं, कोई चेहरा नहीं। साकार रूप में उसकी भक्ति ओर आराधना का वेदों में कोई विधान भी नहीं है। वैसे यह पूरा ब्रह्माण्ड उसका साकार रूप है। प्रकृति की छटां में उसका दिग्दर्शन किया जा सकता है, परन्तु सच्चाई यह भी है कि सामान्य मनुष्य के लिये निराकार की आराधना एक कठिन प्रक्रिया है। विशेष रूप से इस कलियुग में हठयोग और राज योग का अभ्यास अत्यंत कठिन है। उनके लिये तो साकार रूप में कल्पना कर ईश्वर की पूजा अर्चन का भक्ति मार्ग सर्वथा उपयुक्त और सरल भी है। गोस्वामी तुलसीदास के समय विद्या और ज्ञान का नितांत अभाव था। इन परिस्थितियों ने तुलसीदास को रामचरित मानस की रचना के लिये प्रेरित किया, क्योंकि रामचरित मानस के प्रत्येक पात्र द्वारा किसी न किसी जीवन मूल्य का संकेत किया गया है। 'मानस' सामाजिकता का विश्व कोष है। उसकी रचना सम्पूर्ण पीडित मानवता के हित के लिये हुई। मन से रामकथा का पारायण और नाम जप ही साधारण मनुष्यों को शांति और संतोष दे सकता है। यह सत्य है कि रामकथा सबके लिये हितकारी है और समस्त लोक का मंगल करने वाली है।

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