अनमोल वचन

अनमोल वचन

हम अपने जीवन में तृप्ति और सन्तोष पाना चाहते हैं, जिसके लिये हम धन संग्रह, भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति और भोगों के संग्रह में लगे रहते हैं, परन्तु अतृप्ति और असन्तोष जीवन में बने रहते हैं। याद रहे तृप्ति केवल ईश्वर भजन और उसकी भक्ति से ही मिल सकती है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामकथा में बताया है 'राम कथा सुन्दर करतारी संशय विहग उडावन हारी। जैसे गंगा गंगोत्री से निकलती है और सागर तक जाती है। रास्ते में सैंकडों मीलों तक जितने भी जीव हैं, वे उससे लाभ उठाते हैं। भगवत कथा ग्रंथों में थी, तुलसीदास के भगीरथ प्रयासों से वह जन-जन को सुलभ हुई। बाल्मीकि ने राम को महामानव के रूप में प्रतिष्ठित किया। तुलसी ने राम को परब्रह्मा बना दिया। तुलसी की काव्य रचना के मूल में लोक मंगल की भावना काम कर रही थी। सत्य यह है कि 'रामचरित मानस' न तो काव्य कला की प्रेरणा से लिखा गया और न इतिहास की प्रेरणा से, वह तो यथार्थत: लोकहित की भावना से प्रेरित होकर लिखा गया था।

Share it
Top