अनमोल वचन

अनमोल वचन

कामना में चाहत में संसार बसता है और जब तक चाहतें बनी रहती हैं, तब तक संसार से पीछा छूट नहीं सकता। संसार का अर्थ है सुख की खोज में भटकने वाला भ्रांत मन। भटकाव केवल सुख की प्राप्ति के लिये होती है, कहीं से भी किसी से भी एक क्षण के लिये सुख मिल जाये और यदि मिल भी जाये तो वह अन्य सुख दीर्घ सुख में बदल जायें, इस खोज में मन भटकने लगता है। यदि संयोग से ऐसा हो भी जाता है, तो उस सुख को दीर्घ सुख बनाने के लिये अनेक उपक्रम किये जाते हैं और इस प्रकार भ्रांतियों को पूर्ण करने वाली चाहत में मनुष्य अपने जीवन में अनेक भटकनों का शिकार होता है, किन्तु कामनाओं में तृप्ति नहीं मिलती, शान्ति प्राप्त नहीं होती, कारण हम जैसे हैं और जो मिला है, उसमें तृप्ति नहीं। कुछ और मिल जाये, तभी तृप्ति होगी, ऐसी चाहत बनी रहती है। चंद हजार की वेतन वाली नौकरी इसलिए अच्छी नहीं लगती, क्योंकि हमारे पडौसी को ऊंची नौकरी मिली हुई है। उसके पास गाडी, बंगला, आधुनिक सुविधा के साधन उपलब्ध हैं। हम उन जैसी सुविधा साधन पाने की चाहत करने लगते हैं और अतृप्ति की आग में जीवन भर झुलसते रहते हैं। चाहत है तो संसार है और संसार में चाहत की अनगिनत ज्वालाएं उठती रहती हैं, जिनसे मन जलता रहता है और जो भी सुख हमें प्राप्त है, वह कमतर दिखाई देता है।

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