अनमोल वचन

अनमोल वचन

यजुर्वेद के एक मंत्र का अंश 'अहम् ब्रह्मास्मि' का अर्थ बहुत विस्तृत है, परन्तु वर्तमान समय में अधिकांश व्यक्ति 'अहम् ब्रह्मास्मि' को मैं और केवल मैं एवं केवल मेरा को अपनी जीवन शैली का केन्द्र बना चुके हैं। उनके इस 'मैं' के दायरे में घर- परिवार, पास-पडौस, समाज और देश तो दूर, भाई-बहन, मित्र सम्बन्धी, माता-पिता तक सम्मिलित नहीं हैं। ऐसे दौर में हम मानवीय मूल्य और सामाजिक सरोकार की बात तो सोच भी नहीं सकते। यह अभाव हमारे युवाओं में मानसिक तनाव, रोग, टूटन, घुटन और संवेदनहीनता का कारण बनता जा रहा है। आज आये दिन इस प्रकार के समाचार पढने को मिलते हैं कि अमुक स्थान पर अपराध, घटना अथवा हादसे के बाद यदि पीडित को समय से सहायता मिल जाती, अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी, परन्तु अपने में मस्त होने या सामाजिक उत्तरदायित्व में बेपरवाह होने के चलते, नजर में आने के बावजूद लोग अनदेखा करते रहे अथवा फोन पर वीडियो बनाते रहे और घटना के शिकार लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। क्या यह हमारी संस्कृति और सभ्यता से मेल खाते हैं, नहीं, बिल्कुल नहीं।

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