अनमोल वचन

अनमोल वचन

दुर्बुद्धि और अपरिपक्व मानसिकता का व्यक्ति ही अहंकारी होता है, जबकि परिपक्व सदैव अहंकार से दूर रहता है। अहंकारी का व्यवहार सदैव अशिष्टता एवं उद्दंडता से भरा होता है। वह समझता है कि मैं ही सब कुछ हूं। अन्य सभी उसकी दृष्टि में हेय होते हैं। वस्तुत: सफलता को पचा पाने की क्षमता उसके पास नहीं होती। वह आत्ममुग्ध होकर अपने अहंकार को पुष्ट करता है। इसी कारण अहंकारी व्यक्ति को जीवन में जब विफलता मिलती है, तो हताश, निराश और व्याकुल हो उठता है। अहंकार एक ऐसे गुब्बारे के समान है, जिसमें हवा भरी होती है, कोई ठोस तत्व नहीं होता। इसलिए वह एक विफलता रूपी पिन के चुभने से ही फट जाता है। अहंकार जब चोटिल होता है, तो वह बिलबिलाने लगता है, बौखलाने लगता है। यदि ऐसी स्थिति देर तक बनी रही तो वह घबरा जाता है। असफलताओं की श्रृंखला से वह इतना हताश और निराश हो जाता है कि उसके मन में आत्महत्या तक के कायरता के भाव निरंतर आने लगते हैं। आत्मविश्वास बढाने के लिये सुखकर जीवन जीने के बजाय अंगारों पर चलने का साहस होना चाहिए। फूलों पर तो सभी चल लेते हैं, यहां तक कि नादान बच्चा भी संकोच नहीं करता, किन्तु अंगारों पर चलने का साहस तो बिरले ही दिखा पाते हैं।

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