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  • अनमोल वचन

    फिजुलखर्ची देश द्रोह है। इससे बेकारी तथा दुष्प्रवृत्तियों में वृद्धि होती है। अपने जरूरी खर्चों में कंजूसी न दिखायें। कंजूस भी अपव्ययी की तरह सम्मानीय नहीं बन पाता। सामुहिक खर्चों में भी वह अपनी जेब में हाथ नहीं डालता। वह चाहता है कि उसके बदले भी दूसरे खर्च करें। इस प्रकार वह उपहास का पात्र भी बनता...

  • अनमोल वचन

    जो अपने देश की उन्नति चाहते हैं वे पहले अपनी उन्नति करें। जो कमाये धन का दुरूपयोग करते हैं वे पाप करते हैं, जो फिजुल खर्च करते हैं वे न तो कोई अपनी उन्नति के लिए बडा काम कर सकते हैं न अपना सम्मान कायम रख सकते हैं, क्योंकि उसे दूसरों के सामने हाथ पसारना पडेगा। संसार में कोई गरीब है तो कोई अमीर।...

  • अनमोल वचन

    प्रेम हृदय का पवित्र श्रृंगार है। प्रेम वही हृदय कर सकता है, जो पवित्रता, पावनता एवं दिव्यता से आपूरित हो अन्यथा वह वासना, ईष्र्या, द्वेष जैसा कलुषित एवं कालिमायुक्त हो जाता है। आज की सच्चाई यही है कि संसार में प्रेम को इन्हीं बद रंगों के रूप में परिभाषित किया जाता है, संकीर्ण बनाकर परोसा जाता है।...

  • अनमोल वचन

    शास्त्रों में चार पुरूषार्थों का वर्णन है धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। कुछ विद्वानों का मत है कि धर्म से मोक्ष की प्राप्ति होती है और अर्थ से काम सधता है। मनुष्य के लिये श्रेयष्कर है कि धर्म मार्ग पर चलते हुए अर्थोंपार्जन करें। इस प्रकार के प्राप्त धन का उपयोग अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिये करेंगे तो...

  • अनमोल वचन

    बडी अद्भुत बात है कि जीव किसी भी योनि में हो, वह मृत्यु से भय खाता है। मनुष्य तो इसलिए डरता है कि मृत्यु के पश्चात फिर मनुष्य का चोला मिले न मिले, किन्तु निकृष्ट योनियों में तो यह भय नहीं होना चाहिए। इस रहस्य को तो प्रभु ही जानें, किन्तु मनुष्य योनि में युवावस्था में तो इस भय का कुछ आधार भी है कि...

  • अनमोल वचन

    जो अवश्यम्भावी है, उससे डरने का कोई आधार या कारण नहीं। बच्चा पैदा होता है, शनै-शनै युवा होता है, फिर प्रौढावस्था पार कर वृद्धावस्था आती है। वृद्धावस्था आने पर मनुष्य मृत्यु की ओर बढने लगता है और यह मृत्यु का भय कई बार उसे बहुत सताता है। यदि वह मृत्यु से डरेगा तो क्या मृत्यु नहीं आयेगी। वह तो...

  • अनमोल वचन

    बहुधा देखा जाता है कि जिनके पास धन सम्पत्ति अथवा पद-प्रतिष्ठा है, वें सदैव अनेकों मित्रों से घिरे रहते हैं, किन्तु सच्ची बात तो यह है कि उक्त धनी मानी को घेरे रहने वाली भीड में सच्चा मित्र कदाचित ही कोई हुआ करता है। अधिकांश लोभ-लालच से ही उसके साथ लगे रहते हैं और स्वार्थ सिद्ध हो जाने पर अपना...

  • अनमोल वचन

    आज बसंत पंचमी है। आज के परिवेश में नये युग के बसंत की अनुभूति भी होनी चाहिए। बीते युगों में बसंत की अनुभूति के ढंग अलग रहे होंगे, पर वह बीते युग की बात थी। काम, केली व क्रीडा की अठखेलियों में गाये जाने वाले बसंत के गीत अब पुराने पड चुके हैं। अब तो मानव के पराभव के करूण स्वरों में इन्हें गाना होगा।...

  • अनमोल वचन

    आदमी के जीवन की सबसे बडी सफलता यह है कि उसकी सन्तान सुसंस्कारी बने। मनुष्य की श्रेष्ठ पूंजी उसकी सुसंस्कारित संतान ही तो हैं। भौतिक पदार्थ तथा धन सम्पत्ति तो उसके मुकाबले गौण हैं। बच्चा सर्व प्रथम अपने माता-पिता से ही संस्कार ग्रहण करता है। अध्यापक के पास तो वह बाद में जायेगा, जब वह पाठशाला जाने...

  • अनमोल वचन

    हजारों योग्यताएं और लाख समृद्धियों को एक ओर और सुसंस्कारों को एक ओर रखकर तौला जाये तो सुसंस्कारों का पलडा भारी बैठेगा। सुसंस्कारी व्यक्ति निर्धन रहते हुए भी आनन्द और उल्लास का जीवन व्यतीत कर सकता है। इसके विपरीत कुसंस्कारी व्यक्ति कुबेर की सम्पदा और इन्द्र के वैभव का स्वामी होते हुए भी सन्तप्त और...

  • अनमोल वचन

    धन आपका अच्छा सेवक भी है, अच्छा मित्र भी है और बुरा मालिक भी। धन का सही भोग करेंगे तो वह अच्छा सेवक होगा, पुण्य कार्यों में दान आदि में लगायेंगे तो अच्छा मित्र होगा और यदि धन को व्यसनों में, दुराचार में, दूसरों को नीचा दिखाने तथा अहंकार में पोषित करने में लगायेंगे तो वह जाने कैसे संकट में डाल दे,...

  • अनमोल वचन

    मानव को सगे-सम्बन्धियों पर बहुत विश्वास होता है, वह सोचता है कि कठिनाई के अवसर पर वे उसका साथ निभायेंगे, उसके साथ रहेंगे, परन्तु सगे-सम्बन्धी भी कुछ दूर तक साथ निभाते हैं, जैसे ही अग्नि के सुपुर्द किया जाता है, अथवा जल में प्रवाहित कर दिया जाता है अथवा मिट्टी में दबा दिया जाता है, सभी...

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