ईडी का खौफ, पार्टी फंड के लिए विधायक और सांसदों का पैन कार्ड ले रही तृणमूल

ईडी का खौफ, पार्टी फंड के लिए विधायक और सांसदों का पैन कार्ड ले रही तृणमूल


कोलकाता। पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय की सक्रियता के मद्देनजर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस आर्थिक लेन-देन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रही है। पार्टी फंड में आने वाली धनराशि के लिए तृणमूल कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों और सांसदों से स्वहस्ताक्षरित पैन कार्ड की प्रति जमा करने को कहा है। दरअसल तृणमूल सूत्रों ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि नियमानुसार प्रति महीने विधायकों और सांसदों को मिलने वाले भत्ते में से एक निश्चित धनराशि काटकर पार्टी फंड में जमा की जाती है। तृणमूल विधायक दल और संसदीय दल के लिये अलग-अलग बैंक खाते हैं।। विधायकों के भत्ते में से प्रति महीने ₹1000 रुपये की धनराशि काटी जाती है जबकि सांसदों को ₹10,000 रुपये जमा कराने पड़ते हैं। विधायकों के फंड की देखरेख राज्य के खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक के जिम्मे है। कोलकाता स्थितिम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय मुख्यालय में विधायकों के फंड का अकाउंट है।

प्रति महीने चंदा के तौर पर विधायक जो धनराशि देते हैं उसके प्रमाण के तौर पर उनके द्वारा दिया जाने वाला पैन कार्ड का जेरोक्स कॉपी जमा कराया जाएगा। सांसदों के स्वहस्ताक्षरित पैन के जेरोक्स कॉपी का भी इसी तरह से इस्तेमाल किया जाना है। तृणमूल सूत्रों ने बताया कि चुनाव को ध्यान में रखते हुए मतदान से पहले वाले महीने का पूरा भत्ता पार्टी फंड में जमा देने का निर्देश सांसदों और विधायकों को दिया गया है। ऐसे में अचानक पार्टी फंड में बड़ी धनराशि जमा होगी जिस पर ईडी नजर रख रही है। अगर कहीं से भी किसी तरह की चूक हुई तो तृणमूल के खिलाफ जांच शुरू हो सकती है। इसी से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है। बैंक में अगर प्रत्येक जमा के साथ उससे संबंधित पैन कार्ड जमा रहेगा तो इससे स्वच्छता रहेगी। एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि कई बार पार्टी फंड की धनराशि को लेकर सवाल खड़ा हुआ है। केंद्रीय एजेंसियों ने इसके लिए रिपोर्ट भी तलब की है। 2021 के विधानसभा चुनाव में जोरदार मुकाबला होना है और राज्य का माहौल भी कांटे की टक्कर वाला बन गया है। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह से कोई भी लूप होल नहीं छोड़ना चाहती ताकि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए तृणमूल कांग्रेस को घेरा जा सके।

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