शिवराज का कमलनाथ पर कटाक्ष,' आप केवल छिंदवाड़ा के नहीं है बल्कि पूरे मप्र के सीएम है '

शिवराज का कमलनाथ पर कटाक्ष, आप केवल छिंदवाड़ा के नहीं है बल्कि पूरे मप्र के सीएम है


भोपाल। देशभर में खराब मौसम के चलते आंधी तूफान से प्रभावित हुए जनजीवन और जनहानि पर राजनीतिक दलों के बीच ट्वीटर पर युद्ध छिड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा केवल गुजरात के लिए किए गए ट्वीट को लेकर मप्र में कांग्रेस और मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री का घेराव शुरू कर दिया। अब इस घमासान में मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान भी कूद पड़े है और प्रधानमंत्री का बचाव किया है।

शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट कर कमलनाथ को याद दिलाया है कि वे केवल छिंदवाड़ा के सीएम नहीं है बल्कि पूरे मप्र के सीएम है। शिवराज ने यह भी कहा कि प्रदेश में कोई भी आपदा आती है तो नागरिकों की सहायता करने का पहला कर्तव्य मुख्यमंत्री का होता है।

शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट कर लिखा 'आपको यह याद दिलाना ज़रूरी होगा कि आप भी पूरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं न कि सिर्फ छिन्दवाड़ा के! चारों तरफ त्राहि-त्राहि मची है और आपका ध्यान केवल अपने बेटे के चुनाव पर केन्द्रित है। विनती है कि जनता ने आप पर जो विश्वास जताया है,कम से कम उसकी लाज रखें,अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं'। उन्होंने कहा कि 'सिर्फ ट्वीट कर देने से आपका कर्तव्य पूरा नहीं होगा। आला अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे तत्काल मदद हेतु केंद्र से आग्रह करें। आप किसान हितैषी होते तो किसान सम्मान निधि योजना के हितग्राहियों की सूची भेजते लेकिन भाजपा को राजनीतिक लाभ न मिले, ऐसा सोचकर आपने वह सूची नहीं भेजी'।

शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ पर पलटवार करते हुए कहा 'कमलनाथ जी, प्रधानमंत्री जी ने आँधी-तूफान से प्रभावित लोगों को सहायता राशि देने की मंज़ूरी अविलंब दी है। प्रदेश में कोई भी आपदा आती है तो नागरिकों की सहायता करने का पहला कर्तव्य मुख्यमंत्री का होता है लेकिन मध्यप्रदेश में जिस ढंग से आपकी सरकार चल रही है, यह तो जग-ज़ाहिर है'। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि 'जब मैं मुख्यमंत्री था तो ऐसी स्थिति में शासन-प्रशासन को चैन की नींद नहीं लेने देता था, तुरंत जनता के बीच जाकर नागरिकों की समस्याएँ सुनता था और उनके निराकरण में लग जाता था। लेकिन आपको तो तबादले करने से फुरसत ही कहाँ जो आप आम जनता से जुड़े विषयों पर विचार करें'।

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