हिन्दुस्तान यूनिलीवर फैक्ट्री पर सिटी मजिस्ट्रेट ने मारा छापा

हिन्दुस्तान यूनिलीवर फैक्ट्री पर सिटी मजिस्ट्रेट ने मारा छापा


हरिद्वार। बहुराष्ट्रीय कंपनी हरिद्वार में प्रदूषण फैला रही है। इसका खुलासा सिडकुल स्थित हिन्दुस्थान यूनी लीवर फैक्ट्री में सिटी मजिस्ट्रेट के छापे से हुआ। इस फैक्ट्री का केमिकल युक्त जहरीला पानी खुले नालों में बहाया जा रहा है। जिससे इलाके में प्रदूषण फैल रहा रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट ने कंपनी के इस जहरीले पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। प्रशासन कंपनी के खिलाफ कड़ी करवाई की तैयारी कर रहा है।

हिन्दुस्थान यूनी लीवर हरिद्वार के पर्यावरण में जहर घोल रही है। जब उत्तराखंड हाइकोर्ट के एक आदेश के बाद शनिवार को सिटी मजिस्ट्रेट ने सिडकुल स्थित हिंदुस्तान यूनिलीवर फैक्ट्री में छापा मारा तो ये हैरान कर देने वाला सच सामने आया। फैक्ट्री का केमिकल युक्त जहरीला अनुपयोगी पानी व अन्य कचरा खुलेआम सावर्जनिक नालों में डाला जा रहा है। इन नालों से होकर ये जहरीला पानी आसपास की नदियों में जा रहा है।

सिटी मजिस्ट्रेट ने फैक्ट्री से निकलने वाले केमिकल युक्त जहरीले पानी और कचरे का सैम्पल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। उनका कहना है कि वह इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर जिलाधिकारी को भेज रहे हैं। गौरतलब है कि तीन दिन पहले सिडकुल क्षेत्र में इलाके के नालों का पानी पीने व कचरा खाने से सात गायों की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया था कि इन नालों में फैक्ट्रियों का जहरीला पानी और कचरा बड़ी मात्रा में बहाया जा रहा है। इसके बाद तीन फैक्ट्रियों पर दो दिन पहले भी छापेमारी की कारवाई की गई थी और उन पर जुर्माना भी लगाया गया था। आज फिर सिटी मजिस्ट्रेट ने हिंदुस्तान यूनिलीवर पर छापा मारा।

उत्तराखण्ड के लगभग सभी औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यवरण प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का उलंघन हो रहा है। पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी का कहना है कि प्रदेश की फैक्ट्रियों के संयुक्त सर्वेक्षण में 366 फैक्ट्रियों को प्रदूषण फैलाने के मामले में चिन्हित किया गया था लेकिन राजनीतिक कारणों से उन पर करवाई नहीं हो पाई। इन फैक्ट्रियों को एक विशेष कैम्प लगाकर प्रदूषण के मानकों को पूरा करने के लिए कहा गया था मगर उसके बाद भी हरिद्वार के 33 ऐसे उद्योग अभी भी प्रदूषण मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं।

जिनको बंद करने संस्तुति सरकार से की गई है। पिछले दिनों उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा एक आरटीआई पर दिए गए फैसले में भी आदेश दिया गया था। जिसमें कहा था कि फैक्ट्री का कचरा और कैमिकल युक्त पानी नालों, नदियों व खुले में डालने पर तुरंत रोक लगाई जाए। हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी तमाम फैक्ट्रियों का औद्योगिक कचरा खुलेआम नालों व नदियों में डाला जा रहा है। अगर सिडकुल में तीन दिन पहले इस जहरीले पानी को पीने से गायों की मौत पर बबाल न होता तो अभी भी यह कार्रवाई नहीं होती।


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