बेटियों ने राखी बांधी तो छलक आए बाबा गुरमीत के आंसू, एक साल के बाद आमने सामने बैठकर परिवार वालों से हुई मुलाकात

बेटियों ने राखी बांधी तो छलक आए बाबा गुरमीत के आंसू, एक साल के बाद आमने सामने बैठकर परिवार वालों से हुई मुलाकात



बाबा से मिलने से दो बेटियां, पुत्रवधु व डेरा चेयरपर्सन पहुंची सुनारियां जेल, करीब साढे़ चार बजे बाबा के परिजन पहुंचे जेल

जेल प्रशासन ने राखी पर्व के चलते परिजनों को दे रखी थी मिलने की छूट, अन्य कैदियों के लिए खुले जेल के कपाट

रोहतक। सुनारियां जेल में साध्वी यौन शोषण मामले में बीस साल की सजा काट रहे डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह की आखिरकार एक साल बाद अपने परिजनों के आमने सामने बैठकर मुलाकात हो पाई है। रविवार को रक्षाबंधन पर्व को लेकर जेल प्रशासन ने सभी कैदियों को इसकी छूट दे रखी थी। जब बाबा की दोनों बेटियों ने उनकी कलाई पर राखी बांधी तो उनके आंसू छलक आए। बाबा ने दोनों बेटियों को कहा कि सब समय का खेल है। बाबा से मिलने के लिए दो बेटियां, पुत्रवधु व डेरा चेयरपर्सन सुनारियां जेल पहुंचे थे। करीब पौने घंटे की मुलाकात के दौरान बाबा ने डेरा चेयरपर्सन से गतिविधियों के बारे में विचार विमर्श किया। डेरा चेयरपर्सन ने उन्हें बताया कि पहले की तरह नियमित सत्संग जारी है और गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है।

इसके अलावा जेल प्रशासन ने अन्य कैदियों के लिए राखी बंधवाने के लिए अच्छी खासी व्यवस्था की गई थी। जेल में बंद कैदियों को उनकी बहनों ने राखियां बांधी और जो बहने जेल नहीं पहुंच पाई, उन कैदियों को अन्य महिलाओं ने राखी बांधी। इसके अलावा डेरा प्रमुख के लिए बोरे के बोरे भरकर राखियां डाक द्वारा पहुंच रही है। कुछ महिलाओं ने जेल के बाहर पेड़ों को भी राखियां बांधी है। जिला प्रशासन द्वारा जेल से लेकर बाईपास तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए थे।

रविवार शाम करीब चार बजे बाबा राम रहीम की बेटी चरणप्रीत, अमरप्रीत, पुत्रवधु हुसनमीत व डेरा चेयरपर्सन शोभा गौरा जिला कारागार सुनारियां पहुंची। चरणप्रीत व अमरप्रीत ने बाबा की कलाई पर राखी बांधी और पुत्रवधु ने उनका आशीर्वाद लिया। बाबा राम रहीम ने बेटियों व पुत्रवधु को समझाया कि यह समय का खेल है कि उन्हें जेल आना पड़ा, लेकिन वे पाक साफ बाहर आएंगे और कानून पर उनका पूरा विश्वास है। इस दौरान बाबा राम रहीम ने डेरा चेयर पर्सन से अलग से बातचीत की। बाबा ने परिजनों को बताया कि उनका स्वास्थ्य भी ठीक है और वे किसी प्रकार की चिंता न करे। बताया जा रहा है कि 28 अगस्त के बाद बाबा को जेल से पैरोल जाने का रास्ता साफ हो सकता है, लेकिन सबसे बडी अड़चन साधुओं को नपुसंक बनाने के मामले को लेकर है।

इस मामले में तीन दिन पहले ही सीबीआई ने उनकी जमानत याचिका खारिज है, जब तक इस मामले में जमानत नहीं हो जाती है, तब तक पैरोल में कानूनी अड़चन है। यह भी बताया जा रहा है कि जमानत मिलने के बाद ही बाबा पैरोल के लिए अर्जी देंगे। सुनारियां जेल में रक्षा बंधन पर्व को लेकर प्रशासन द्वारा तमाम प्रबंध किए गए थे। कैदियों को उनकी बहनों से आमने सामने मिलवाया गया, जबकि राखियों व मिठाईयों का प्रबंधन भी जेल प्रशासन द्वारा किया गया था।


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